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इंदु सरकार मूवी रिव्यू

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हमारी रेटिंग:- 3 / 5
पाठकों की रेटिंग:-3 / 5
कलाकार:-कृति कुल्हारी, तोता रॉय चौधरी, अनुपम खेर, नील नितिन मुकेश
निर्देशक:-मधुर भंडारकर
मूवी टाइप:-Drama
अवधि:-2 घंटा 19 मिनटआपके शहर में शो टाइम
कहानी: इंदु का पति एक सरकारी मुलाज़िम है और इमर्जेंसी के जरिए अपने करियर को बूस्ट करना चाहता है, लेकिन इंदु नैतिकता और विचारधारा के बहाव में अपना अलग रास्ता चुन लेती है।

रिव्यू: ऐसा लग रहा है कि मधुर भंडारकर बहुत सधकर उस वक्त की तरफ वापस कदम बढ़ा रहे हैं जब वह मनगढ़ंत कहानियों को असली जैसा दिखाने के बजाय असली घटनाओं को दिखाने पर जोर देते थे।

इस बार वह किसी खास इंडस्ट्री की काली हकीकत उघाड़ने नहीं जा रहे हैं, बल्कि इंदु (कीर्ति कुल्हारी) की काल्पनिक कहानी के बहाने से उन्होंने 1975 से 1977 के बीच लागू हुई इमर्जेंसी के असली हालातों की तरफ ध्यान दिलाने की कोशिश की है।
इंदु, बहुत शर्मीली अनाथ लड़की है जो हकलाती है। उसे नवीन सरकार (तोता रॉय चौधरी) में एक साथी मिलता है, जो उसके हकलाने को दरकिनार कर उससे पूछता है कि वह ज़िन्दगी से क्या चाहती है। उसे इस सवाल का जवाब शादी के बाद मिलता है जब वह अपने पति को उन नेताओं के सुर में सुर मिलाते देखती है जो इमर्जेंसी से फायदा उठाने के लिए नियमों की कमर तोड़ रहे हैं। उसकी नैतिकता उसे विद्रोह करने पर मजबूर कर देती है और उसकी खूबसूरत जिन्दगी उससे छिन जाती है।

फिल्म में 19 महीने की इमर्जेंसी को काफी जल्दबाज़ी में दिखाया गया है। पार्टी के नेताओं को हद से ज्यादा बुरा दिखा दिया गया है और विद्रोही हिम्मत इंडिया संगठन (इंदु जिसमें शामिल है) को हद से ज्यादा अच्छा दिखा दिया गया है। भंडारकर यहां राजनैतिक रूप से निष्पक्ष नहीं रह पाए हैं। फिल्म के डायलॉग संजय छेल ने लिखे हैं। कुछ बेहतरीन डायलॉग भागते सीन के बीच खो गए हैं और ‘गरीबों को जीने का हक नहीं है’ जैसी बेमानी बातों को बेवजह तवज्जो मिली है। आधी फिल्म गुजर जाने के बाद जब फिल्म पकड़ बनाती है, तो एक सरप्राइज कव्वाली आकर फिर फ्लो को तोड़ देती है।

हालांकि, ‘इंदु सरकार’ उस वक्त शानदार लगती है जब वह लीड किरदार की भावनाओं और दुविधाओं के बीच संघर्ष पर फोकस करते हुए पॉलिटिक्स को पीछे छोड़ती दिखती है। इंदु और नवीन की कहानी उनके आसपास बुनी जा रहीं राजनीतिक साजिशों से कहीं ज्यादा रोचक है। कृति कुल्हारी ने अपने कंधों पर लीड रोल को खूबसूरती से निभाने की जिम्मेदारी को बखूबी संभाला है। अपने रोल के साथ उनकी ईमानदारी आपका इंटरेस्ट बनाए रखती है। तोता रॉय चौधरी ने भी इंदु के किरदार का भरपूर साथ दिया है।

इंदु सरकार के साथ भंडारकर ने कई सारे चोचले छोड़े हैं और अपनी बात स्क्रीन पर बखूबी रखी है। लेकिन ‘पेज 3’ का जादू रीक्रिएट करने में नाकामयाब रहे हैं।

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